भारतीय कला जगत से एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। महान चित्रकार राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध पेंटिंग यशोदा और कृष्ण ने नीलामी में नया इतिहास रच दिया है।
1 अप्रैल 2026 को मुंबई में हुई Saffronart की नीलामी में यह पेंटिंग रिकॉर्ड 167.2 करोड़ रुपये में बिकी। इस कीमत के साथ यह अब तक की भारत की सबसे महंगी बिकने वाली आधुनिक कला कृति बन गई है।
इस पेंटिंग को देश के मशहूर उद्योगपति साइरस पूनावाला ने खरीदा है, जो पहले से ही कला और विरासत से जुड़ी चीजों में अपनी गहरी रुचि के लिए जाने जाते हैं।
अनुमान से दोगुनी कीमत — क्यों खास है यह नीलामी?
नीलामी से पहले इस पेंटिंग की अनुमानित कीमत इससे काफी कम मानी जा रही थी, लेकिन बोली के दौरान इसकी कीमत लगातार बढ़ती गई और आखिरकार यह अपने अनुमान से 100% से भी ज्यादा कीमत पर बिकी। यह पेंटिंग सिर्फ एक कलाकृति नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और भावनाओं का गहरा प्रतीक है। इसमें मां यशोदा और बाल कृष्ण के बीच के स्नेह और ममता को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है।
राजा रवि वर्मा की खासियत यही थी कि उन्होंने भारतीय पौराणिक कथाओं को ऐसे रूप में चित्रित किया, जिसे आम लोग भी आसानी से समझ और महसूस कर सकें।
यही वजह है कि उनकी पेंटिंग्स आज भी लोगों के दिलों से जुड़ी हुई हैं। राजा रवि वर्मा को भारतीय कला के इतिहास में एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है। उन्होंने भारतीय देवी-देवताओं और पौराणिक पात्रों को आधुनिक तकनीक के साथ कैनवास पर उतारा और उन्हें एक नया जीवन दिया।
उनकी कला ने न सिर्फ भारत में, बल्कि विदेशों में भी पहचान बनाई।
‘यशोदा और कृष्ण’ जैसी कृतियां उनके उसी दृष्टिकोण का उदाहरण हैं, जहां कला और भावनाएं एक साथ दिखाई देती हैं। इस नीलामी ने एक बात साफ कर दी है कि भारतीय कला बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अब भारतीय कलाकारों की कृतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उतनी ही गंभीरता से लिया जा रहा है, जितनी पश्चिमी कला को। यशोदा और कृष्ण’ की इस ऐतिहासिक बिक्री के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में और भी भारतीय पेंटिंग्स बड़े रिकॉर्ड बना सकती हैं। कला विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह की दिलचस्पी बनी रही, तो भारतीय कला बाजार नए स्तर पर पहुंच सकता है।

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