अम्बिकापुर: संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की बड़ी पहल, 250 से अधिक पौधों का रोपण; हरित फेंसिंग के लिए दिया गया वैज्ञानिक प्रशिक्षण
अम्बिकापुर, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता को बढ़ावा देने और विश्वविद्यालय परिसर को अधिक हरित, स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, अंबिकापुर द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई। विश्वविद्यालय के फार्म फॉरेस्ट्री विभाग के तत्वावधान में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम एवं बीज आधारित हरित फेंसिंग (ग्रीन फेंसिंग) विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेन्द्र लकपाले की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वनमंडल अधिकारी श्वेता कंबोज उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण कर किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति, मुख्य अतिथि, छत्तीसगढ़ वन विभाग के प्रशिक्षण अधिकारी, कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी की सहभागिता से विश्वविद्यालय परिसर में 250 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया।
पर्यावरण संरक्षण और हरित परिसर की दिशा में कदम
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आयोजित इस अभियान का मुख्य उद्देश्य परिसर में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना है। पौधारोपण के माध्यम से न केवल प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर और स्वस्थ वातावरण तैयार होगा।
इस अभियान के तहत लगाए गए पौधों के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि विश्वविद्यालय परिसर भविष्य में एक समृद्ध हरित क्षेत्र के रूप में विकसित हो सके।
बीज आधारित हरित फेंसिंग पर विशेषज्ञों ने समझाई तकनीक
वृक्षारोपण कार्यक्रम के बाद आयोजित प्रशिक्षण कार्यशाला में छत्तीसगढ़ वन विभाग के विशेषज्ञों ने बीज आधारित हरित फेंसिंग विकसित करने की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार सही बीजों का चयन, भूमि की उचित तैयारी, बीज बोने की सही गहराई एवं दूरी, मिट्टी में नमी बनाए रखने की प्रक्रिया, अंकुरण और प्रारंभिक पौधों की देखभाल के माध्यम से मजबूत एवं प्राकृतिक हरित फेंसिंग तैयार की जा सकती है।
विशेषज्ञों ने कहा कि हरित फेंसिंग पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिसर की सुंदरता बढ़ाने और प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने में भी सहायक होती है।
विश्वविद्यालय परिसर में तीन दिवसीय बीजारोपण अभियान शुरू
प्रशिक्षण कार्यशाला के पश्चात विश्वविद्यालय परिसर की खुली बाउंड्री पर तीन दिवसीय बीजारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अभियान के अंतर्गत खुली सीमा वाले क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के बीजों का रोपण कर प्राकृतिक एवं स्थायी हरित फेंसिंग विकसित की जाएगी।
इस पहल से विश्वविद्यालय परिसर में हरित आवरण को मजबूती मिलेगी और आने वाले वर्षों में यहां एक प्राकृतिक सुरक्षा घेरा तैयार होगा। साथ ही यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
विद्यार्थियों ने दिखाई सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी विभागों के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने पौधारोपण करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और हरित परिसर निर्माण में अपना योगदान दिया।
कार्यक्रम का समन्वय फार्म फॉरेस्ट्री विभाग द्वारा किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. कौशल सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, वन विभाग के विशेषज्ञों, अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर प्रयास करना होगा। ऐसे अभियान लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणा प्रदान करते हैं।

