नियद नेल्लानार योजना का बड़ा असर: नारायणपुर के मोहन्दी और मसपुर गांव में पहली बार पहुंची बिजली, दशकों का इंतजार हुआ खत्म
नियद नेल्लानार योजना से बदली आदिवासी गांवों की तस्वीर
छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी नियद नेल्लानार योजना सुदूर वनांचल क्षेत्रों में विकास की नई इबारत लिख रही है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र के ग्राम मोहन्दी और मसपुर के लोगों का वर्षों पुराना सपना आखिरकार पूरा हो गया। इन गांवों में पहली बार बिजली पहुंचने से ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही है। दशकों तक लालटेन और ढिबरी की रोशनी में जीवन बिताने वाले परिवार अब बिजली की रोशनी में अपने भविष्य के नए सपने देख रहे हैं।
इन गांवों में बिजली पहुंचने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ग्रामीणों के दैनिक जीवन में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। बिजली मिलने से ग्रामीण अब मोबाइल चार्ज कर सकेंगे, पंखों का उपयोग कर पाएंगे और आधुनिक सुविधाओं का लाभ भी धीरे-धीरे मिलने लगेगा।
वर्षों का अंधेरा हुआ दूर
मोहन्दी और मसपुर जैसे दुर्गम आदिवासी गांव लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के कारण यहां बिजली पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। लेकिन राज्य सरकार ने नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए इन गांवों तक बिजली पहुंचाने का कार्य पूरा किया।
जैसे ही गांव में पहली बार बल्ब जला, ग्रामीणों की खुशी देखने लायक थी। कई बुजुर्गों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके गांव में भी बिजली आएगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य को मिलेगा नया सहारा
बिजली पहुंचने का सबसे बड़ा लाभ गांव के बच्चों को मिलेगा। अब वे रात में भी आराम से पढ़ाई कर सकेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी उपकरणों का उपयोग आसान होगा और टीकाकरण तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी। मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल सेवाओं का उपयोग भी पहले की तुलना में अधिक आसान होगा।
विकास की नई राह पर बढ़ रहा अबूझमाड़
नियद नेल्लानार योजना का उद्देश्य केवल बिजली पहुंचाना नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। सरकार का प्रयास है कि नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को भी मुख्यधारा के विकास से जोड़ा जाए। मोहन्दी और मसपुर में बिजली पहुंचना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
ग्रामीणों ने सरकार और बिजली विभाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उनके बच्चों का भविष्य पहले से अधिक उज्ज्वल होगा। बिजली आने से गांव में छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
नारायणपुर जिले के मोहन्दी और मसपुर गांव में पहली बार बिजली पहुंचना केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि उन हजारों आदिवासी परिवारों के सपनों का साकार होना है जो वर्षों से अंधेरे में जीवन बिता रहे थे। नियद नेल्लानार योजना ने यह साबित कर दिया है कि यदि मजबूत इच्छाशक्ति और सही योजना के साथ कार्य किया जाए तो सबसे दुर्गम क्षेत्रों तक भी विकास की रोशनी पहुंचाई जा सकती है। आने वाले समय में यह योजना छत्तीसगढ़ के अन्य दूरस्थ गांवों के लिए भी नई उम्मीद लेकर आएगी।

