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Jharkhand Protest 2026: 15वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन, सरकार ने दूसरे गुट को बातचीत के लिए बुलाया पढ़ें पूरी खबर

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Jharkhand Protest: 15वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन, सरकार ने दूसरे गुट को बातचीत के लिए बुलाया, JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े अभ्यर्थी



Jharkhand Student Protest 2026: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ छात्र और अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार, 8 अगस्त 2026 को यह आंदोलन अपने 15वें दिन में प्रवेश कर गया। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करना और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच शामिल है।

लगातार कई दिनों से राजधानी रांची में चल रहे इस आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के अलग-अलग गुटों से बातचीत का रास्ता अपनाया है। सरकार और आंदोलन के एक गुट के बीच हुई बातचीत से तत्काल कोई समाधान नहीं निकल पाया। इसके बाद सरकार ने अब देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले दूसरे गुट के प्रतिनिधियों को भी बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। इससे उम्मीद जगी है कि लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को बातचीत के माध्यम से खत्म किया जा सकता है।

15वें दिन भी नहीं थमा आंदोलन

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का यह आंदोलन 25 जुलाई 2026 से जारी है। शुरुआत से ही बड़ी संख्या में अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। समय बीतने के साथ आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया है और अब यह केवल एक परीक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था और अभ्यर्थियों के भरोसे का सवाल बन गया है।

शनिवार को आंदोलन के 15वें दिन भी प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से पीछे हटने के संकेत नहीं दिए। सरकार की ओर से बातचीत की पहल जरूर हुई है, लेकिन छात्रों का कहना है कि केवल बातचीत पर्याप्त नहीं होगी। वे चाहते हैं कि उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय ले और परीक्षा से जुड़े विवादों को स्पष्ट रूप से दूर किया जाए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते रहे हैं। मौजूदा आंदोलन में विशेष रूप से 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में ऐसी परिस्थितियां सामने आई हैं जिनसे अभ्यर्थियों के बीच निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल पैदा हुए हैं। आंदोलनकारी चाहते हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय हो सके।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। यही वजह है कि आंदोलनकारी लगातार स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग

आंदोलनकारियों की सबसे प्रमुख मांग 14वीं JPSC PT परीक्षा को रद्द करने की है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा को लेकर उठे सवालों का समाधान तभी संभव होगा जब पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो।

कुछ प्रदर्शनकारी संगठनों ने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी यानी CBI से कराने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों की समिति से जांच कराने का विकल्प भी सामने रखा गया है।

छात्रों का तर्क है कि जांच ऐसी संस्था या समिति से होनी चाहिए जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो। आंदोलनकारियों के मुताबिक निष्पक्ष जांच से ही यह साफ हो पाएगा कि परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

सरकार ने दूसरे गुट को भी बातचीत के लिए बुलाया

आंदोलन के बीच सरकार ने अलग-अलग गुटों के प्रतिनिधियों से बातचीत का रास्ता चुना है। पहले प्रदर्शनकारी छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की गई। हालांकि इस बातचीत से आंदोलन समाप्त नहीं हुआ और छात्र अपनी मांगों पर कायम रहे।

अब सरकार ने देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व वाले गुट के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार सरकार की ओर से इस गुट के साथ बातचीत की पहल शनिवार को की गई।

सरकार के इस कदम को आंदोलन के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आंदोलन में अलग-अलग छात्र संगठनों और समूहों की भागीदारी दिखाई दे रही है।

देवेंद्र नाथ महतो का अनशन भी जारी

आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल देवेंद्र नाथ महतो ने भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है। रिपोर्टों के अनुसार शनिवार तक उनका अनशन सातवें दिन में पहुंच गया था।

अनशन के कारण आंदोलन का मुद्दा और अधिक गंभीर हो गया है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द उनकी मांगों पर निर्णय ले, ताकि आंदोलन और अनशन को समाप्त किया जा सके।

महतो की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनका अनशन जारी है और पानी पीना अनशन समाप्त करने के बराबर नहीं है। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार का ध्यान छात्रों की मांगों की ओर आकर्षित करना है।

सरकार के साथ बातचीत क्यों महत्वपूर्ण है?

लगातार 15 दिनों से चल रहे आंदोलन के कारण अब बातचीत सबसे महत्वपूर्ण रास्ता बनकर सामने आई है। यदि सरकार और छात्रों के बीच किसी सहमति पर पहुंचा जाता है तो आंदोलन को समाप्त करने का रास्ता खुल सकता है।

दूसरी ओर, यदि बातचीत में छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो आंदोलन आगे और तेज हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने पहले ही संकेत दिया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर वे 10 अगस्त को विधानसभा मार्च कर सकते हैं।

इस कारण आने वाले कुछ दिन झारखंड सरकार और आंदोलनकारी छात्रों दोनों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं?

झारखंड के आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की मांगों को मोटे तौर पर इस प्रकार समझा जा सकता है—

पहली मांग: 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए।

दूसरी मांग: परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

तीसरी मांग: जांच ऐसी एजेंसी या समिति से कराई जाए जिस पर अभ्यर्थियों को विश्वास हो।

चौथी मांग: भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

पांचवीं मांग: यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता या जिम्मेदारी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों युवाओं का भविष्य परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है। इसलिए भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह के संदेह को गंभीरता से दूर किया जाना चाहिए।

JPSC और JSSC को लेकर बढ़ा असंतोष

मौजूदा आंदोलन केवल JPSC तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी JSSC की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से असंतोष की स्थिति रही है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि जब युवा वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं, आवेदन शुल्क जमा करते हैं और परीक्षा के लिए मेहनत करते हैं, तब उन्हें निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था मिलना जरूरी है।

इसी वजह से JPSC और JSSC से संबंधित किसी भी विवाद का सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

आंदोलन में राजनीतिक समर्थन भी बढ़ा

छात्र आंदोलन के बढ़ने के साथ राजनीतिक स्तर पर भी इसकी चर्चा तेज हुई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने भी छात्रों की मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी है।

हालांकि छात्रों के आंदोलन का मूल मुद्दा भर्ती परीक्षा और उसकी निष्पक्षता है। प्रदर्शनकारी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका आंदोलन अभ्यर्थियों के अधिकार और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़ा है।

कई छात्र संगठन और गुट मैदान में

मौजूदा आंदोलन की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अलग-अलग छात्र संगठनों और गुटों की भागीदारी दिखाई दे रही है। इसी वजह से सरकार ने भी अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत शुरू की है।

पहले एक गुट के साथ बातचीत हुई और उसके बाद दूसरे गुट को वार्ता के लिए बुलाया गया। सरकार के सामने चुनौती यह है कि सभी प्रमुख छात्र समूहों की मांगों को समझकर ऐसा समाधान निकाला जाए जिसे आंदोलनकारी स्वीकार कर सकें।

दूसरी ओर, छात्र संगठनों के सामने भी यह चुनौती है कि वे अपनी मांगों को एकजुट तरीके से सरकार के सामने रखें।

10 अगस्त का विधानसभा मार्च क्यों महत्वपूर्ण?

आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 10 अगस्त को विधानसभा मार्च की चेतावनी दी है।

यदि उससे पहले सरकार और छात्रों के बीच ठोस सहमति बन जाती है तो विधानसभा मार्च को लेकर स्थिति बदल सकती है। लेकिन बातचीत विफल रहती है तो 10 अगस्त का कार्यक्रम आंदोलन के अगले बड़े चरण के रूप में सामने आ सकता है।

इसलिए सरकार की बातचीत और आने वाले निर्णय पर सभी की नजर बनी हुई है।

सरकार के सामने क्या चुनौती है?

राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करना और अभ्यर्थियों के बीच विश्वास बहाल करना है।

यदि सरकार केवल आश्वासन देती है और छात्रों को ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तो आंदोलन जारी रहने की संभावना बनी रह सकती है। दूसरी ओर यदि सरकार किसी स्वतंत्र जांच या अन्य ठोस प्रक्रिया पर सहमति देती है तो बातचीत के जरिए समाधान निकल सकता है।

सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी नौकरी की परीक्षाओं से जुड़े विवाद सीधे युवाओं और रोजगार के मुद्दे से जुड़े होते हैं।

अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा में पारदर्शिता क्यों जरूरी?

प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी कई वर्षों तक तैयारी करते हैं। एक परीक्षा के लिए विद्यार्थी को कोचिंग, किताबों, टेस्ट सीरीज और यात्रा जैसी कई चीजों पर खर्च करना पड़ सकता है।

ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर यदि कोई विवाद सामने आता है तो उसका प्रभाव केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रहता। अभ्यर्थियों का समय, पैसा और मानसिक मेहनत भी प्रभावित होती है।

इसी कारण छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षा प्रणाली में ऐसी व्यवस्था हो जिससे किसी भी स्तर पर संदेह की स्थिति पैदा न हो और यदि कोई शिकायत सामने आती है तो उसकी समयबद्ध तरीके से जांच हो।

आगे क्या हो सकता है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत का परिणाम क्या निकलता है।

अगर दोनों पक्ष किसी समझौते पर पहुंचते हैं तो 15 दिनों से चल रहा आंदोलन समाप्त हो सकता है। सरकार द्वारा दूसरे गुट को बातचीत के लिए बुलाना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

लेकिन यदि बातचीत में 14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने और स्वतंत्र जांच जैसी प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।

10 अगस्त का प्रस्तावित विधानसभा मार्च इस पूरे मामले में अगला बड़ा घटनाक्रम हो सकता है।

छात्रों की नजर अब सरकार के अगले फैसले पर

15 दिनों से जारी आंदोलन ने झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर दी है। छात्र अपनी मांगों पर कायम हैं और सरकार बातचीत के जरिए गतिरोध खत्म करने की कोशिश कर रही है।

दूसरे गुट को बातचीत के लिए बुलाए जाने के बाद अब उम्मीद है कि सरकार सभी पक्षों को साथ लेकर कोई रास्ता निकाल सकती है। हालांकि अंतिम समाधान तभी संभव होगा जब आंदोलनकारी छात्रों को सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई दिखाई दे।

फिलहाल JPSC-JSSC भर्ती परीक्षा विवाद और छात्र आंदोलन पर पूरे झारखंड की नजर बनी हुई है। सरकार की आगामी बैठक और उसमें होने वाली चर्चा यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी कि आंदोलन समाप्त होता है या आने वाले दिनों में इसका दायरा और बढ़ता है।

नोट: परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच के बाद ही माना जाना चाहिए। यह रिपोर्ट उपलब्ध ताजा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है।

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