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PM Modi Independence Day Speech 2026: ‘Fragile 5’ से Fastest-Growing Economy तक

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India Was Among ‘Fragile 5’, Now World’s Fastest-Growing: PM Modi’s Independence Day Speech 2026 के प्रमुख बयान



 15 अगस्त 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। यह उनका लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन था। भाषण में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति, आत्मनिर्भरता, युवाओं की शक्ति, राष्ट्रीय एकता और 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य पर विस्तार से बात की।

इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम “150 Years of Vande Mataram” और “Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047” पर केंद्रित रही। समारोह में वंदे मातरम् को विशेष महत्व दिया गया।

‘Fragile Five’ से तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था तक

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की सबसे चर्चित बात भारत की आर्थिक यात्रा को लेकर रही। उन्होंने कहा कि एक समय भारत को दुनिया की ‘Fragile Five’ अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ने उल्लेखनीय बदलाव किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। उन्होंने इस बदलाव का श्रेय देश के करोड़ों नागरिकों के संकल्प, मेहनत और सामूहिक प्रयास को दिया।

यह बयान उनके भाषण के आर्थिक हिस्से का प्रमुख संदेश रहा। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की बदलती वैश्विक स्थिति और देश की बढ़ती आर्थिक क्षमता से जोड़ते हुए कहा कि अब भारत को और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित भारत बनने का बड़ा लक्ष्य रखा है। स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए आर्थिक विकास, तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करना आवश्यक होगा।

उन्होंने देशवासियों से बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

मोदी ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे इस बात का विश्वास बढ़ाती हैं कि विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

“हर दिल में गूंज रहा है वंदे मातरम्”

स्वतंत्रता दिवस समारोह में वंदे मातरम् को विशेष स्थान दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के हर नागरिक के दिल में वंदे मातरम् की भावना गूंज रही है।

उन्होंने राष्ट्रगीत को देश की एकता, देशभक्ति और राष्ट्रीय भावना से जोड़ते हुए स्वतंत्रता आंदोलन के योगदान को भी याद किया।

इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई और उनके बलिदान को याद किया गया।

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को नमन

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत स्वतंत्रता सेनानियों और उन सभी महान व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि देकर की, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने कहा कि आजादी केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं थी, बल्कि इसके पीछे करोड़ों भारतीयों का संघर्ष, त्याग और बलिदान था। स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को पूरा करना आज की पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को आगे बढ़ाते समय हमें उन मूल्यों को याद रखना चाहिए जिनके लिए स्वतंत्रता आंदोलन लड़ा गया था।

युवाओं पर विशेष जोर

इस साल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाओं की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया। कार्यक्रम की थीम में भी “Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047” को प्रमुखता दी गई।

प्रधानमंत्री ने युवाओं को भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बताया। उन्होंने तकनीक, नवाचार, उद्यमिता और नए क्षेत्रों में भारतीय युवाओं की क्षमता का उल्लेख किया।

उनका संदेश था कि आने वाले वर्षों में भारत की दिशा तय करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होगी।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आत्मनिर्भरता को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनाया। उन्होंने रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की घरेलू क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर चिप्स जैसे क्षेत्रों को उन्होंने भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। भारत की आर्थिक और तकनीकी मजबूती के लिए इन क्षेत्रों में देश की क्षमता बढ़ाना आवश्यक बताया गया।

यह संदेश ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में आपूर्ति श्रृंखला, तकनीकी निर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा बड़े मुद्दे बने हुए हैं।

गरीबी कम करने का दावा

प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में गरीबी कम करने की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं और इसे भारत की विकास यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने विकास को केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं बताया, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में सुधार से जोड़कर प्रस्तुत किया।

भारत की बदलती वैश्विक पहचान

प्रधानमंत्री के भाषण का एक बड़ा हिस्सा इस बात पर केंद्रित रहा कि भारत ने पिछले वर्षों में वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की है।

‘Fragile Five’ से दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने का उल्लेख इसी संदर्भ में किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे देश के लोगों की मेहनत और दृढ़ संकल्प का परिणाम बताया।

उन्होंने कहा कि भारत को अब केवल बड़े लक्ष्य हासिल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, बल्कि अपनी क्षमता के अनुरूप और भी बड़े सपने देखने चाहिए।

प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के लिए सहायता

स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री ने हाल की बाढ़ से प्रभावित परिवारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना जताते हुए सरकार की ओर से सहायता और पुनर्वास का भरोसा दिलाया।

इससे भाषण में राष्ट्रीय विकास के साथ-साथ मौजूदा मानवीय चुनौतियों का भी मुद्दा शामिल हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के प्रमुख संदेश

प्रधानमंत्री के संबोधन से निकलने वाले प्रमुख संदेशों को इस प्रकार समझा जा सकता है:

  • भारत की आर्थिक स्थिति में पिछले वर्षों में बड़ा बदलाव हुआ है।

  • भारत अब दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में है।

  • 2047 तक विकसित भारत बनाना राष्ट्रीय लक्ष्य है।

  • युवाओं को भारत की विकास यात्रा में प्रमुख भूमिका निभानी होगी।

  • आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

  • वंदे मातरम् राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति का महत्वपूर्ण प्रतीक है।

  • स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को पूरा करना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है।

  • भारत को भविष्य के लिए बड़े लक्ष्य और महत्वाकांक्षी योजनाएं बनानी होंगी।

क्यों महत्वपूर्ण है ‘Fragile Five’ वाला बयान?

‘Fragile Five’ शब्द का इस्तेमाल 2013 के आसपास उन पांच बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए किया गया था जिन्हें बाहरी वित्तीय झटकों के प्रति अपेक्षाकृत संवेदनशील माना जाता था। भारत के संदर्भ में इस पुराने टैग का उल्लेख प्रधानमंत्री ने वर्तमान आर्थिक स्थिति के साथ तुलना करने के लिए किया।

2026 के स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसका इस्तेमाल एक राजनीतिक और आर्थिक संदेश के रूप में हुआ—यानी भारत की आर्थिक कहानी में पिछले वर्षों में बड़ा बदलाव आया है।

प्रधानमंत्री ने इसी तुलना के जरिए देशवासियों को यह संदेश देने की कोशिश की कि भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्था में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस भाषण मुख्य रूप से भारत की आर्थिक प्रगति, आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के इर्द-गिर्द रहा।

Fragile Five से दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था’ वाला बयान भाषण की सबसे चर्चित पंक्तियों में रहा। इसके साथ प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए भविष्य के लिए और बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया।

लाल किले से दिया गया यह संबोधन केवल पिछले वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख नहीं था, बल्कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं और दीर्घकालिक दृष्टि को सामने रखने का प्रयास भी था।


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