सूरजपुर में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई: धान की रोपाई कर रहे 4 नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू, संयुक्त टीम ने की छापेमार कार्रवाई
सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में बाल श्रम के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए रामानुजनगर विकासखंड के एक गांव में खेत में धान की रोपाई कर रहे चार नाबालिग बच्चों का रेस्क्यू किया। यह कार्रवाई चाइल्डलाइन 1098 पर प्राप्त शिकायत के बाद जिला प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई को बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल श्रम उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, चाइल्डलाइन 1098 पर सूचना मिली थी कि रामानुजनगर विकासखंड के एक खेत में नाबालिग बच्चों से धान की रोपाई कराई जा रही है। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्डलाइन 1098, श्रम विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम गठित की। टीम ने मौके पर पहुंचकर खेत का निरीक्षण किया, जहां चार बच्चे बड़ों के साथ धान की रोपाई करते हुए पाए गए।
जांच के दौरान टीम ने पाया कि रेस्क्यू किए गए बच्चों में दो लड़के और दो लड़कियां शामिल हैं। सभी बच्चे स्थानीय विद्यालयों में कक्षा 5वीं, 6वीं और 7वीं के विद्यार्थी हैं। अधिकारियों ने बच्चों को खेत से सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी काउंसलिंग की तथा उनके परिजनों से भी बातचीत की। साथ ही बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
जिला प्रशासन ने बताया कि बच्चों से श्रम कराना न केवल उनके बचपन और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि यह कानूनन भी अपराध है। बच्चों का स्थान स्कूल और खेल का मैदान है, न कि खेत, फैक्ट्री या अन्य कार्यस्थल। प्रशासन ने कहा कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उनका सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अधिकारियों ने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों एवं किशोरों से प्रतिबंधित परिस्थितियों में श्रम करवाना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इस मामले में भी संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जिला बाल संरक्षण इकाई और श्रम विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी किसी बच्चे से मजदूरी या बाल श्रम कराया जाता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तुरंत चाइल्डलाइन 1098, पुलिस या जिला प्रशासन को दें। समय पर दी गई सूचना से बच्चों को शोषण से बचाया जा सकता है और उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सूरजपुर जिले में बाल श्रम के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम समय-समय पर निरीक्षण कर ऐसे मामलों की जांच करेगी। साथ ही लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा छोड़कर मजदूरी करने के लिए मजबूर न हो।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है, जब प्रत्येक व्यक्ति बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए सजग रहे और किसी भी प्रकार के बाल श्रम की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग तक पहुंचाए। बच्चों का सुरक्षित, शिक्षित और उज्ज्वल भविष्य ही विकसित समाज और विकसित छत्तीसगढ़ की सबसे मजबूत नींव है।

