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बिलासपुर में शिक्षा व्यवस्था की खुली पोल, पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे, आनन-फानन में बनी वैकल्पिक व्यवस्था

Admin


 सरकार एक ओर शाला प्रवेश उत्सव मनाकर हर बच्चे तक बेहतर शिक्षा पहुंचाने का दावा कर रही है. वहीं दूसरी ओर फिर से इन दावों की हकीकत बयां करती एक तस्वीर बिलासपुर जिले से सामने आई है. तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम घुटकू के स्टेशनपारा में सरकारी प्राथमिक स्कूल के बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. ईटीवी भारत की टीम ने मौके पर पहुंचकर शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर और सरकारी स्कूल का हाल जाना.

पांच साल निजी मकान में चला स्कूल

ग्रामीणों के अनुसार स्कूल का भवन वर्षों पहले खेत के बीच बनाया गया था, जहां तक पहुंचने के लिए सड़क और सुरक्षित रास्ता तक नहीं था. भवन जर्जर होने के बाद पिछले पांच साल से स्कूल गांव के एक शाला समिति सदस्य के निजी मकान में निशुल्क चल रहा था. लेकिन परिवार बढ़ने के कारण मकान मालिक ने अपना घर वापस ले लिया, जिसके बाद स्कूल के सामने जगह की समस्या खड़ी हो गई.

अब पेड़ के नीचे लग रही कक्षाएं

वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण पिछले कुछ दिनों से पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं पेड़ की छांव में लगी. बच्चे सड़क किनारे चटाई पर बैठकर पढ़ाई कर रहे थे. शिक्षक भी खुले में पढ़ाने को मजबूर थे. बारिश, धूप और कीड़े-मकोड़ों के बीच पढ़ाई से खतरा भी बना हुआ था.

अभिभावक बच्चों का नाम कटवाने पहुंचे

स्कूल में फिलहाल करीब 10 बच्चों का नामांकन है. पहली और दूसरी कक्षा में एक भी छात्र नहीं है. अभिभावकों का कहना है कि खुले में पढ़ाई और अव्यवस्था के कारण वे अपने बच्चों का ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) निकलवाने पहुंचे हैं.


अब फिर की गई वैकल्पिक व्यवस्था

पुराना स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल तक पहुंचने के लिए बच्चों को रेल पटरी पार करनी पड़ती थी. बारिश के समय खेतों में पानी और कीचड़ भर जाता था, जिससे हर दिन हादसे का खतरा बना रहता था. इसके बाद जब ETV भारत की टीम पेड़ के नीचे पढ़ते बच्चों की रिपोर्टिंग के लिए वहां पहुंची तो इसी बीच वहां जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल समेत कई अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और गांव में ही वैकल्पिक भवन की व्यवस्था की गई. साथ ही नए भवन का भी जल्द निर्माण का दावा किया गया.

6 महीने से भवन स्वीकृत है लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण भवन नहीं बन पा रहा था, वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गई है और आज ही भवन निर्माण का कार्य भी शुरू हो गया है.– रामेश्वर जायसवाल,जिला शिक्षा अधिकारी


नए भवन के लिए राशि मंजूर

शिक्षा विभाग के अनुसार नए स्कूल भवन के निर्माण के लिए 11 लाख 48 हजार रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है. हाल ही में राशि भी जारी कर दी गई है और जल्द निर्माण कार्य शुरू करने की बात कही गई है. लेकिन जगह के चलते यहां निर्माण कराना भी चुनौती से कम नहीं होगा.

12 जून को हमें राशि मिली है. जगह की समस्या थी, छोटे बच्चे थे और स्टेशन सामने है इसलिए जमीन के चयन में सावधानी बरती है. निर्माण कार्य शीघ्र पूरा होगा. स्कूल निर्माण करने में जो भी समस्या आएगी उसे दूर करेंगे.- सत्यव्रत तिवारी, जिला पंचायत CEO

अब भी कायम कई सवाल

सरकार बेहतर शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के दावे कर रही है, लेकिन घुटकू गांव की तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े करती हैं. पांच साल तक निजी मकान में स्कूल चलने के बाद भी स्थायी भवन क्यों नहीं बन पाया? निजी मकान खाली होने के बाद बच्चों को खुले में पढ़ने की नौबत क्यों आई? पुराने भवन को तय मानकों के अनुसार क्यों नहीं बनाया गया? और नए भवन का निर्माण कब शुरू होगा और कब तक बनेगा? ऐसे कई सवाल अब भी बने हुए हैं.

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