15 अगस्त और हरेली के पोस्टरों पर सियासत तेज, भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर नहीं होने पर विपक्ष ने उठाए सवाल
छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस और प्रदेश के पारंपरिक लोकपर्व हरेली को लेकर लगाए जा रहे प्रचार पोस्टरों पर अब राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। विपक्ष ने साय सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि इन पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की तस्वीरों को प्रमुखता दी गई है, लेकिन देश की आस्था और छत्तीसगढ़ की संस्कृति की प्रतीक भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी की तस्वीर को जगह नहीं दी गई है।
विपक्ष का कहना है कि 15 अगस्त केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे देश की भावनाओं से जुड़ा राष्ट्रीय पर्व है। इसी तरह हरेली छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। ऐसे अवसरों पर प्रदेश की पहचान और भावनात्मक जुड़ाव के प्रतीक छत्तीसगढ़ महतारी तथा राष्ट्र की श्रद्धा के प्रतीक भारत माता को सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए।
विपक्ष ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के माध्यम से सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पोस्टर और प्रचार सामग्री तैयार करते समय यह एक बड़ी चूक हुई है। नेताओं का कहना है कि सरकार को राजनीतिक चेहरों के साथ-साथ उन प्रतीकों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए, जिनसे करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रदेश और देश के संवैधानिक पदों पर हैं, लेकिन भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी जनता की भावनाओं और पहचान का प्रतीक हैं। इसलिए किसी भी बड़े राष्ट्रीय और सांस्कृतिक आयोजन में इनका सम्मान होना आवश्यक है।
विपक्ष ने उम्मीद जताई है कि अभी 15 अगस्त और हरेली पर्व में समय बाकी है। ऐसे में सरकार अपनी कथित गलती को सुधार सकती है और संशोधित पोस्टरों में भारत माता एवं छत्तीसगढ़ महतारी को भी उचित स्थान दे सकती है।
वहीं, इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में पोस्टरों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ जैसे सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य में क्षेत्रीय पहचान और परंपराओं से जुड़े मुद्दे अक्सर संवेदनशील हो जाते हैं। हरेली जैसे लोकपर्व से छत्तीसगढ़ के ग्रामीण समाज और संस्कृति का गहरा जुड़ाव है, इसलिए इससे जुड़े प्रतीकों को लेकर उठे सवालों पर राजनीतिक हलचल बढ़ना स्वाभाविक है।

