विजय शंकर ने भारत के लिए 12 वनडे और नौ T20I खेले।
सन्यास वाले फै़सले के बाद 35 वर्षीय ऑलराउंडर अब विदेशी फ़्रेंचाइजी लीग में खेल सकेंगे।
विजय शंकर ने घरेलू क्रिकेट और IPL से संन्यास ले लिया है। उन्होंने 2018 और 2019 के बीच भारत के लिए सीमित ओवर के क्रिकेट में कुल 21 मुक़ाबले खेले हैं। इस फै़सले के बाद 35 वर्षीय सीम गेंदबाज़ी ऑलराउंडर अब विदेशी फ़्रेंचाइजी लीग में हिस्सा ले सकेंगे। विजय शंकर ने 12 वनडे मैचों में 31.85 की औसत और 90.65 के स्ट्राइक रेट से 223 रन बनाए। वहीं नौ T20I मुक़ाबलों में उन्होंने 25.25 की औसत और 138.35 के स्ट्राइक रेट से 101 रन बनाए।उन्होंने अपने घरेलू करियर का बड़ा हिस्सा तमिलनाडु के लिए खेला। उनकी कप्तानी में टीम ने विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी, देवधर ट्रॉफ़ी और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी जीती। 2025-26 सीज़न से पहले वह त्रिपुरा से जुड़ गए थे।उन्होंने अपने घरेलू करियर का अंत शानदार अंदाज़ में किया। फ़रवरी में रणजी ट्रॉफ़ी में गुजरात के ख़िलाफ़ जीत में उन्होंने नाबाद 151 रन बनाए और प्लेयर ऑफ़ द मैच रहे।कुल मिलाकर विजय शंकर ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 46.73 की औसत से 4253 रन बनाए। लिस्ट ए क्रिकेट में उनके नाम 34.87 की औसत से 2790 रन हैं। वहीं T20 क्रिकेट में उन्होंने 26.09 की औसत और 128.37 के स्ट्राइक रेट से 2583 रन बनाए। उन्होंने सभी फ़ॉर्मेट मिलाकर 348 मैचों में 154 विकेट भी लिए।दिसंबर में हुए आख़िरी IPL ऑक्शन में वह अनसोल्ड रहे थे। उन्होंने पांच साल से ज़्यादा समय से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेला था, इसलिए उन्होंने अनकैप्ड खिलाड़ी के तौर पर अपना नाम दिया था।विजय शंकर ने 2014 से 2025 के बीच कुल 78 IPL मैच खेले। इस दौरान उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स, सनराइजर्स हैदराबाद, दिल्ली कैपिटल्स और गुजरात टाइटंस का प्रतिनिधित्व किया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में विजय शंकर 2019 विश्व कप से पहले चर्चा में आए थे, जब भारत नंबर 4 बल्लेबाज़ की तलाश में था। उस समय टीम इस स्थान को लेकर लगातार संघर्ष कर रही थी। विजय शंकर ने तकनीकी रूप से मजबूत मिडिल ऑर्डर बल्लेबाज़ और मीडियम पेस गेंदबाज़ के रूप में चयनकर्ताओं को प्रभावित किया। इंग्लैंड की परिस्थितियों में वह छठे गेंदबाज़ का विकल्प भी दे सकते थे। आख़िरकार उन्होंने विशेषज्ञ बल्लेबाज़ अंबाती रायडू को पीछे छोड़ते हुए भारत की विश्व कप टीम में जगह बनाई।तब चयन समिति के अध्यक्ष रहे एमएसके प्रसाद ने कहा था कि विजय शंकर को रायडू पर इसलिए तरजीह दी गई क्योंकि वह टीम को "थ्री डाइमेंशन" देते हैं। हालांकि विजय शंकर का विश्व कप सफर ज़्यादा लंबा नहीं चला। उन्होंने तीन मैच खेले और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ ओल्ड ट्रैफर्ड में मिली जीत में उन्होंने अहम योगदान दिया। उस मैच में उन्होंने दो विकेट लिए, जिसमें विश्व कप क्रिकेट की अपनी पहली ही गेंद पर विकेट भी शामिल था।लेकिन टूर्नामेंट के बीच में ही वह चोटिल हो गए। नेट्स में जसप्रीत बुमराह की यॉर्कर उनके पैर के अंगूठे पर लगी, जिससे फ्रैक्चर हो गया और वह विश्व कप से बाहर हो गए।विजय शंकर ने इंस्टाग्राम पर अपने संन्यास पोस्ट में भी इस चयन विवाद का जिक्र किया। उन्होंने पोस्ट के अंत में खु़द को "Your 3D cricketer" लिखते हुए अपने संवाद का अंत किया।

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